शाखा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते हैं

शाखा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते है 
माँ का वंदन सांझ सबेरे, श्रद्धा सुमन चढ़ाते है 
संघ साधना अर्चन-पूजन प्रतिदिन शीश झुकाते है 
भारत माँ के भव्य भाल पर भगवा ध्वज पहराते है 
माँ का वंदन सांझ सबेरे, श्रद्धा सुमन चढ़ाते है 

इसकी रज में खेल-खेल कर तन चन्दन बन जाते है 
योग,खेल,रवि नमस्कार से स्वस्थ शरीर बनाते है 
स्नेहभाव से मिलते-जुलते, मन-मत्सर मर जाते है 
माँ का वंदन सांझ सबेरे, श्रद्धा सुमन चढ़ाते है 

लोगसंगठक के संवाहक, गटनायक बन जाते है 
कुंभकार की रचना करके, गणशिक्षक कहलाते है 
देशभक्ति का गीत हृदय में, मातृभक्ति पनपाते है 
माँ का वंदन सांझ सबेरे, श्रद्धा सुमन चढ़ाते है 

मधुकर की तप साधना, वज्रशक्ति बन जायेगी 
माँ बैठेगी सिंहासन पर, यश-वैभव को गायेगी 
केशव-माधव का यह दर्शन, मोहजाल कट जाते है 
माँ का वंदन सांझ सबेरे, श्रद्धा सुमन चढ़ाते है 

 शाखा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते है 
माँ का वंदन सांझ सबेरे, श्रद्धा सुमन चढ़ाते है
संघस्थान मंदिर सा पावन, मन दर्पण हो जाते है 

Comments

Popular posts from this blog

मातृ चरणों मे समर्पित है युगों की साधना

है अमित सामर्थ्य मुझमें याचना मैं क्यो करुँगा?

मैं स्वयंसेवक मुझे, न चाह हे जयगान की