मैं स्वयंसेवक मुझे, न चाह हे जयगान की
मैं स्वयंसेवक मुझे, न चाह हे जयगान की ।
मैं स्वयंसेवक मुझे, न चाह हे जयगान की ।
मैं स्वयंसेवक मुझे, परवाह न यशगान की ।
मैं पूजा का पुष्प हूँ, आराध्य माता भारती ।
मैं स्वयंसेवक मुझे ....
परम मंगलवत्सला माँ, गोद मे जिसकी पला मैं-२
जिस धरा के अन्न-जल से, नित्यप्रतिपल हूं बढ़ा मैं ।
प्राणदीप से मैं उतारू-२ , उस धरा की आरती ...। ।
मैं स्वयंसेवक मुझे ...॥१॥
धर्मपथ पे मैं चला हूं, अटल यह विश्वास मेरा -२
सुजन रक्षण असुर मर्दन, श्रेष्ठ जीवन कार्य मेरा ।
धर्म हित महायुद्ध को हे-2, माँ मुझे ललकारती । ।
मैं स्वयंसेवक मुझे ....॥२॥
अग्निपथ पर मैं चला हूं, छोड़ सुखमय मार्ग जग का-२
कण्टको से पूर्ण पथ पर, नित्य हे स्वीकार चलना
श्रेष्ठतम बलिदान की-२, हे मातृभू अधिकारी ।
मैं स्वयंसेवक मुझे ....॥३॥
ना रहे कुछ भिन्नता अब, बन सकूं मैं अंश तेरा-२
बिंदुबनकर संघसरिता, कर सकूं अभिषेक तेरा ।
तव चरण पर वन्दना-२, स्वीकार हे माँ भारती । ।
मैं स्वयंसेवक मुझे ....॥४॥
मैं स्वयंसेवक मुझे, न चाह हे जयगान की ।
मैं स्वयंसेवक मुझे, न चाह हे जयगान की ।
मैं स्वयंसेवक मुझे, परवाह न यशगान की ।
मैं पूजा का पुष्प हूँ, आराध्य माता भारती ।
मैं स्वयंसेवक मुझे ....॥
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