शत शत नमन भरतभूमि को, अभिनंदन भारत माँ को
शत शत नमन भरतभूमि को, अभिनंदन भारत माँ को
जिसके रजकण मात कर रहे, मलयगिरि के चन्दन को
उत्तर में गिरिराज हिमालय माँ का मुकुट संवारता
दक्षिण में रत्नाकर माँ के पावन चरण पखारता
बुला रही हर अज्ञानी को गीता ज्ञान सुनाने को
शत शत नमन भरतभूमि को ................... ||1||
जिसके रजकण मात कर रहे, मलयगिरि के चन्दन को
उत्तर में गिरिराज हिमालय माँ का मुकुट संवारता
दक्षिण में रत्नाकर माँ के पावन चरण पखारता
बुला रही हर अज्ञानी को गीता ज्ञान सुनाने को
शत शत नमन भरतभूमि को ................... ||1||
राम-कृष्ण की पावन धरती, जो शक्ति संचार करे
जन-जन में बलिदान भावना, कूट-कूट कर नित्य भरे
अर्जुन-भीम-शिवाजी जैसे, गुण निर्माण कराने को
शत शत नमन भरतभूमि को ................... ||2||
इस धरती पर जन्म लिया है, यह सौभाग्य हमारा है
इस पर ही हो जीवन अर्पित, यह संकल्प हमारा है
बार-बार यह जीवन पाए, इस पर ही बलि जाने को
शत शत नमन भरतभूमि को ................... ||3||
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