दुःशासन की तोड़ भुजाये, पांचाली का क्लेश हरेगें
दुःशासन की तोड़ भुजाये
पंचाली का शोक हरेंगे
काट तमिस्रा की कारायें
कण- कण में आलोक भरेंगे।
हमने पहचाना है उनको
जो समाज को तोड़ रहे हैं,
भारतीय चिन्तन की धारा
छल दल से जो मोड़ रहे हैं;
हम अपनी संगठन शक्ति से
षडयंत्रो पर रोक करेंगे।
अत्याचारी शासन में ही
भंग हुई थी मर्यादायें,
करुणा की धरती पर लुटती
सत्य अहिंसा की आत्मायें
हम विजिगीषु वृति के वाहक
तीक्ष्ण शरों की नोक करेंगे।
हर दम्भ से दर्प दलन कर
रोपेंगे हम विजय पताका,
रच देंगे अभिनव समाज
हम सत्य शील समता-ममता
उच्चादर्शों की आभा से
आलोकित यह लोक करेंगे
वीरवृती हम ध्येयनिष्ठ हैं
विजयशालिनी शान्ति खड़ी है,
भारत माँ के श्रीचरणों में
सदा समर्पित भक्ति खड़ी है;
कोटिक कंठों से उच्चारित
हिन्दु राष्ट्र का उदघोष करेंगे
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